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चंपारण आंदोलन के शताब्दी वर्ष पर दिल्ली के दिल में विशाल चरखे का अनावरण

चंपारण आंदोलन के 100 साल पूरे होने पर दिल्ली के दिल कनॅाट प्लेस में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा हेरीटेज चरखा संग्रहालय का उद्घाटन और एक विशाल स्टील के चरखे का आनावरण किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय एमएसमई मंत्री कलराज मिश्र, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा, केंद्रीय शहरी विकास राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह, केंद्रीय राज्य एमएसमई मंत्री हरिभाई पार्थीभाई चौधरी, बीजेपी की नई दिल्ली से सांसद मीनाक्षी लेखी और खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना आदि भी मौजूद थे।

स्टील चरखा 8 मीटर लम्बा, 4 मीटर उंचा, 2.45 चौडा है। इस चरखे का वजन 3.5 टन है। यह 316 ग्रेड के स्टेनलेस स्टील से बना है, जिसके ऊपर बारिश और धूप का असर नहीं होगा। और इसकी चमक हमेशा बरक़रार रहेगी। आयोजन में 9 राज्यों के चरखा कारीगरों को 500 चरखे भी वितरित किये गए।

केंद्रीय एमएसमई मंत्री कलराज मिश्र ने अमित शाह द्वारा चरखे का अनावरण करने पर उनका अभिवादन व्यक्त किया। आयोजन में खादी के फीते से बने टोकन जिन्हें तिहाड़ जेल की महिलाओं द्वारा गंगा बेन कुटीर में बनाया गया है, को भी शुरु किया गया है। मिश्र वहां उपस्थित सभी कारीगरों से मिले तथा उनके द्वारा किये गए कार्यों का सराहना की।

अमित शाह ने एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्र और केवीआईसी को इस कार्य का शुरु होने की बधाई दी। और कहा कि मुझे विश्वास है कि यह चरखा संग्रहालय खादी उद्योग के प्रोत्साहित करेगा तथा खादी को और लोकप्रिय बनाएगा। शाह द्वारा म्यूजियम का उद्घाटन करने के बाद विभिन्न प्रकार के चरखों का अवलोकन भी किया गया।

उन्होंने कहा कि चरखा स्वराज और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, यह संग्रहालय और स्मारक चरखे के ऐतिहासिक महत्व को एक गौरवपूर्ण श्रद्धांजलि है।

केवीआईसी चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि जिस तरह से मेमोरियल सनिकों को समर्पित होते हैं उसी तरह से यह मेमोरियल गाँव के लोगों को समर्पित है और उनका प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लुधियाना में चलाया गया चरखा भी यहाँ के म्यूजियम में आम जनता के लिए रखा गया है।

इस अवसर पर महात्मा गाँधी की एक प्रतिमा का अनावरण भी गणमान्य अथितियों ने किया। इस संग्राहलय को एमएसएमई मंत्रालय द्वारा दिल्ली को दिये गए एक तोहफे के रुप में भी देखा जा रहा है।