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11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने वाला MSME सेक्टर देश को विकसित बना सकता है | कलराज मिश्र

केंद्रीय एमएसएमई मिनिस्टर कलराज मिश्रा ने कहा है कि एमएसएमई के माध्यम से ही उद्यमशीलता को बढ़ाया व अधिक रोजगार पैदा किया जा सकता है। एमएसएमई सेक्टर के विकास के जरिए ही हमारे सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि हो सकती है।

इस आधार पर भारत एक विकसित देश बन सकता हैं क्योंकि कृषि के बाद एमएसएमई सेक्टर ही अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को बढ़ाता है।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स आफ इंडिया को दिये गए अपने इंटरव्यू में मिश्र ने कहा कि एमएसएमई का देश के विनिर्माण क्षेत्र में 45 फीसदी और निर्यात में 42 फीसदी योगदान है। वहीँ सकल घरेलू उत्पाद अर्थात जीडीपी का 37 फीसदी हिस्सा MSMEs से आता है।

उन्होंने कहा कि MSMEs ने लगभग 7,000 से अधिक उत्पादों का उत्पादन किया है जिससे कि बड़े स्तर पर रोजगार बढ़ा है। मंत्री के अनुसार अब तक 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को एमएसएमई के माध्यम से रोजगार मिला है।

उन्होंने बताया कि आज पूरे देश में 5 करोड़ से ज्यादा पंजीकृत व गैर पंजीकृत एमएसएमई इकाईयां है। हम इन यूनिट्स को क्लस्टर में परिवर्तित करने पर जोर दे रहे हैं।

मिश्र ने आगे कहा है कि सरकार ने इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु कई लाभकारी योजनाओं की शुरुआत की है जिसमें से एक स्फूर्ति योजना है।

मिश्र के अनुसार पहले देश में केवल 15 से 20 स्फूर्ति क्लस्टर थे। लेकिन अब पुरानी योजनाओं को नया नजरिया दिया गया है। उसी का परिणाम है कि आज देश में 49 स्फूर्ती क्लस्टर क्षेत्र हैं और 71 निर्माण प्रक्रिया में हैं।

एमएसएमई मिनिस्टर ने MSME इकाइयों के रजिस्ट्रेशन पर कहा कि एमएसएमई मंत्रालय का उद्देश्य इंडस्ट्री क्लस्टर का विकास करना, एमएसएमई के विकास में खर्च को बढ़ाना और अधिक पारदर्शिता के लिए सब कुछ ऑनलाइन करना है। 2015 में उद्योग आधार मेंमोरेंडम (यूएएम) को शुरू किया गया था। जहाँ उद्यमी ऑनलाइन सभी प्रासंगिक जानकारी दर्ज कर पांच मिनट में अपना उद्योग आधार नंबर प्राप्त कर सकते हैं। साल 2006 – 15  केवल 21.9 लाख कंपनियों को यूएम के तहत पंजीकृत किया गया था। जबकि सितंबर 2015 से अब तक 30 लाख से अधिक नए पंजीकरण किए गए हैं।

मंत्री ने मक इन इंडिया में SMEs के रोल पर बताया कि भारत को एक विनिर्माण केंद्र बनाना हमारा एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। पहले एमएसएमई के लिए ऋण प्राप्त करना एक बड़ी समस्या हुआ करता था। यूनिट्स को पहले 1 करोड़ रुपए के बिना गारंटी के ऋण की अनुमति दी गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट के फैसले के माध्यम से किसी भी तीसरे पक्ष की गारंटी के बिना ऋण सीमा को बढ़ाकर 2 करोड़ रूपए कर दिया है। इसके लिए क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फंड स्कीम के माध्यम से भुगतान किया जाता हैं। सरकार ने 2,500 करोड़ रुपए के फंड कोष में 5000 करोड़ रूपए की राशि बढ़ाकर इसे 7,500 करोड़ रुपये कर दिया है। जिससे कि एमएसएमई सेक्टर में मजबूती आये और अधिक से अधिक कंपनियां ऋण ले सकें।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार 2012 के कानून के तहत केंद्र और राज्यों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा 20 प्रतिशत खरीद अनिवार्य रूप से छोटे व्यवसायों से होनी चाहिए। जबकि व्यवहार में ऐसा नहीं हो रहा था और हमने इसे 1 अप्रैल, 2015 से अनिवार्य कर दिया है। खरीद के तहत, हम रक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और कार्यान्वयन को सही ढंग से देख रहे हैं। इस 20 प्रतिशत में से  4% खरीद एससी / एसटी उद्यमों से भी होनी चाहिए।

Inputs: Times of India