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Khadi:ग्लोबल होगी खादी, यूनाइटेड नेशन में उपयोग के लिए सरकार कर रही है बातचीत

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा खादी को प्रोत्साहित करने के बाद खादी की मांग में लगातार बढ़ेत्तरी हुयी है। इससे उत्साहित एमएसएमई मिनिस्ट्री के अंतर्गत कार्यरत खादी की नोडल एजेंसी खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने शरणार्थियों के यूनाइटेड नेशन हाई कमिशनर (UNHCR) से क्षेत्रीय संचालन और शिविरों में पारंपरिक खादी का उपयोग करने के लिए आग्रह किया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक खबर के अनुसार केवीआईसी चेयरमेन विनय कुमार सक्सेना ने UNHCR के चीफ फिलिपो ग्रांडी से अपने लिखित पत्र के जरिए कहा है कि पारंपरिक खादी का उपयोग करने से जो लोग विदेशों में विस्थापित हैं, उनको सुविधा होगी और स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि खादी लाखों ग्रामीण भारतीयों को आत्मनिर्भर बनाता है और टिकाऊ आजीविका का समर्थन करता है। केवीआईसी हथकरघा और कुटीर उद्योग के प्रचार के लिए भी एक सरकारी निकाय है।

कार्यालयों, अस्पतालों, रेलवे और एयरलाइंस में खादी के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ मोदी सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम से भी जुड़ी खादी के लिए प्रभावशाली विकास की रचना की है।

देश में लंबे समय से खादी को बनाए रखने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर का उपयोग किया जाता है। जिसमें वो चरखे का उपयोग कर रहे हैं।

सक्सेना ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र रिफ्यूजी एजेंसी, केवीआईसी के कंबल, कालीन, कपड़े और खादी से बनी अन्य वस्तुओं का उपयोग अपने शिविर में कर सकती है।

सक्सेना ने कहा कि यूएनएचसीआर ने अभी प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया है। अगर यूएनएचसीआर सहमत हो जाता है, तो केवीआईसी खादी उत्पादों को सही कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए तैयार है, जो यूएन एजेंसी की परिचालन आवश्यकताओं के मुताबिक है।

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी हेंडलूम प्रोडेक्ट के विस्तार के लिए “खादी फॅार नेशन खादी फॅार फैशन” के नारे का उपयोग भी कर रहे हैं।

महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित सात राज्यों में सरकारी कर्मचारी सप्ताह में एक दिन खादी से बने कपड़े पहनते हैं।

केवीआईसी का वार्षिक कारोबार साल 2015-16 में 37,000 करोड़ रुपये था। जो कि बढ़कर वर्ष 2016-17 में 51, 997 करोड़ रुपये हो गया है।

सक्सेना ने कहा है कि हम विलेज इंडस्ट्री के माध्यम से गांवों और शहरी केंद्रों में  साल 2016-17 में 4.69 लाख नौकरियां पैदा करने में सफल हुए हैं।