Biz Astro | जल्द ही दूर होगा हीरा उद्योग से मंदी का दौर, SMEs देगीं रोजगार


चमकता हुआ सितारा जिसका डंका पूरी दुनिया में बजता दिखा वो है हीरा उद्योग्। प्राप्त सूत्रों से ज्ञात होता है कि विश्व में अत्यधिक मात्रा में जो मांग बनी रहती है वो भारत से प्राप्त हीरे की ही रहती है। भारत की ज्यादातर प्रसंस्करण इकाई गुजरात में ही व्याप्त है जिसमें भावनगर, अहमदाबाद और सूरत मुख्य […]


Screenshot_2017-02-22-09-43-26-1चमकता हुआ सितारा जिसका डंका पूरी दुनिया में बजता दिखा वो है हीरा उद्योग्।

प्राप्त सूत्रों से ज्ञात होता है कि विश्व में अत्यधिक मात्रा में जो मांग बनी रहती है वो भारत से प्राप्त हीरे की ही रहती है।

भारत की ज्यादातर प्रसंस्करण इकाई गुजरात में ही व्याप्त है जिसमें भावनगर, अहमदाबाद और सूरत मुख्य है, इनमे भी सूरत का इस उद्योग में मुख्य स्थान है।

गुजरात से बाहर मुम्बई भी भारत के हीरा उद्योग में काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

जहाँ गुजरात में ज्यादातर इकाइयां इसकी घिसाई, पोलिश इत्यादि से सम्बन्ध रखती हैं वहीँ मुम्बई में स्थापित अधिकतर कॉर्पोरेट इकाइयां इसके आयात-निर्यात्त में कार्यरत हैं।

लगभग 10 लाख से अधिक लोग इसके प्रसंस्करण से रोजगार अर्जित करते हैं जिनमें छोटे व् मझोले उद्योगों (SMEs) की संख्या काफी ज्यादा है।

इस उद्योग में भी असंघटित इकाइयों की संख्या बहुत ही अधिक है जो की विस्तृत रूप से फैला हुआ है।

पिछले कुछ वर्षों से इस उद्योग् में कुछ कमजोरी देखी जा रही है जिसमें ख़ास तौर पर 2014 के बाद से काफी मंदी का दौर नज़र आ रहा है।

पारंपरिक ज्योतिष में सदा ही रत्नों को काफी महत्व दिया गया जिसमें हर रत्न का सम्बन्ध एक ग्रह से जोड़ा गया।

शुक्र गुरु व् चंद्र आदि ग्रहों को हमेशा ही रत्न इत्यादि से सम्बन्ध रखने वाले ग्रह माने गए हैं।

इन ग्रहों की रश्मियों के द्वारा किस हद तक प्रभाव रत्न के उद्योग् पर पड़ता है ये बहुत विश्लेषण का विषय बनता है।

ग्रह योगों पर नज़र करते हैं तो पाते हैं कि शनि की संक्रमित कर देने वाली दृष्टि इस उद्योग में आयी हुई मंदी की पुष्टि कर रही है। साथ ही साथ सूर्य की रश्मियों का प्रभाव समझ आता है जो की जन की जीवन शैली में परिवर्तन को प्रदर्शित करता है।

वर्तमान भारतीय कुंडली को जब गौर से देखते हैं तो पाते हैं कि शुक्र काफी हद तक प्रथम सूर्य के प्रभाव से अस्त होता दिख रहा था वहीँ चन्द्र प्रभाव वश स्थिर हो रहा है जिसका सीधा संबंध हीरे उद्योग् की मंदी से जोड़कर देखा जा सकता है।

आशा करते है कि मंदी का असर जल्द ही दूर हो ताकि इस उद्योग से जुड़े रोज़गार प्राप्त लोगो के जीवन की चमक भी उसी तरह बनी रहे जिस प्रकार हीरे की चमक दिखाई देती है।

(उपरोक्त लेख मात्र वर्तमान स्थिति को समझने के लिए ज्योतिष संशोधन शोध का एक भाग है। इसके लेखक नवनीत ओझा ज्योतिष संशोधक एवं आध्यात्मिक साधक हैं। उपरोक्त व्यक्त किये गए विचार लेखक के अपने विचार हैं।)

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