Biz Astro | SMEs देंगी अर्थव्यवस्था को नए आयाम, पैदा करेंगी नए रोजगार


छोटे व् मझोले उद्योग बड़ी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं भारत के अर्थ तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए। जहाँ सकल औद्योगिक उत्पाद में छोटे व् मझोले उद्योग का योगदान 45 प्रतिशत के करीब बनता है वहीँ रोज़गार सर्जन में भी इनकी काफी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। 4 करोड़ के करीब आबादी इस […]


Screenshot_2017-02-18-08-19-46-1छोटे व् मझोले उद्योग बड़ी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं भारत के अर्थ तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए। जहाँ सकल औद्योगिक उत्पाद में छोटे व् मझोले उद्योग का योगदान 45 प्रतिशत के करीब बनता है वहीँ रोज़गार सर्जन में भी इनकी काफी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। 4 करोड़ के करीब आबादी इस क्षेत्र से अपना जीवन यापन अर्जित करती है।

भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी की गयी योजनाओं और साथ ही साथ पुरानी योजना में कुछ हद तक परिवर्तन के साथ पुनः लागू करने में भी SME सेक्टर को प्रोत्साहित करने की ओर ध्यान केंद्रित किया जाता रहा है, ऐसा विशेषतः प्रतीत होता है।

स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्टार्टअप आदि जैसी योजनाओं के स्वरूप में छोटे व् मध्यम उद्योगों को गति प्रदान करना व् रोज़गार सर्जन करने की मंशा ही दिखाई देती है।

भारत सरकार द्वारा समय-समय पर आर्थिक सुधारों में तेज़ी व् इस क्षेत्र को तकनीकी मदद देने का प्रयास किया जाता रहा है, GST बिल को संसद में पास करा लेना इन्ही महत्वपूर्ण क़दमों की पुष्टि कर रहा है।

ग्रहों की ओर जब नज़र करते है तो काफी सकारात्मक संभावनाओं की ओर ही दृष्टि जाती है।

शनि, बुध, सूर्य व् मंगल इस क्षेत्र पर विशेष अपना प्रभाव रखते हैं।

सूर्य व् मंगल का आपसी योग स्थिर परिवर्तन को प्रस्तुत कर रहा है जो कि काफी महत्वपूर्ण भूमिका भविष्य निर्माण के लिये बनाता दिख रहा है।

सूर्य मंगल की शुभ स्थिति से ही भिन्न-भिन्न योजनाओं के माध्यम से छोटे-छोटे उद्योग् में लिप्त लोगों के लिए काफी उत्तम जीवन शैली का निर्माण कर सकते हैं।

जहाँ महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ इन उद्योगों को मिल सकता है वहीँ सरकार द्वारा कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं के द्वारा इस क्षेत्र को और मज़बूती प्रदान करने की दिशा में काफी योग्य रह सकता है।

सूर्य के प्रभाववश जहां नवसृजन व् तकनीकी उपयोग की ओर संभावनाओं को बल मिलता है वही मंगल की महत्वपूर्ण स्थितिहोने से मानव संसाधनों की उपयोगिता दर्शाता है।

भविष्य के लिए प्राप्त संकेतों में लघु एवं मध्यम उद्योगों की भूमिका और अधिक सराहनीय होती दिखाई देती है जो की रोज़गार प्राप्ति एवं देश की अर्थ व्यवस्था को नए आयाम दे सकती है।

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