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Happy Times@SMEs | सीबीडीटी ने किया स्पष्ट, 50 करोड़ से अधिक का कारोबार होने पर भी 25% ही टैक्स देना होगा

इनकम टैक्स विभाग का कहना है कि जिन कंपनियों ने साल 2015-16 में 50 करोड़ रुपये से कम कारोबार किया था उनकों 1 अप्रैल से 25 फासदी की दर पर ही कर देना होगा, चाहें उनका करोबार साल 2016-17 या इससे बाद के वर्षों में सीमा से ज्यादा हो।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष सुशील चंद्रा ने कहा है कि आयकर विभाग जल्द ही स्पष्टीकरण जारी करेगा जिस पर कंपनियों को कर लाभ प्राप्त होगा।

एसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के क्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली नें आमबजट 2017–18 में 50 करोड़ तक का सलाना कारोबार करने वाली छोटी कंपनियों के लिए इनकम टैक्स अर्थात कॉर्पोरेट टैक्स को कम करके 25 प्रतिशत कर दिया है जो पहले 30 फीसदी था।

चंद्रा ने कहा कि अगर कंपनियों का टर्न ओवर 2015–16 में 50 करोड़ रुपये था तो उनको 25 फासदी की दर पर ही टैक्स देना होगा।

फाइनेंस बिल-2017 के मेमोरेंड़म के अनुसार, “घरेलू कंपनियों के मामले में आयकर दर 25 प्रतिशत ही रहेगी अगर उनका पिछले साल का टर्न ओवर 50 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।“

इसके अलावा अगर कंपनी साल 2016-17 व 2017-18 में 50 करोड़ रुपये की सीमा से अधिक का व्यापार किया है तब भी कंपनियां 25 फीसदी रियायती कर दर की हकदार होंगी।

वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि जिन कंपनियों का टर्न ओवर साल 2015-16 में 50 करोड़ रुपये था कर लाभ उठाने के योग्य है अगर बाद के वर्षों में नियमों के बाहर हों।

सरकार द्वारा अभी भी नई कंपनियों जिन्होंने 2016-17 में या 2017-18 में व्यवसाय स्थापित किया है लाभ कर की स्पष्टता की प्रतीक्षा में हैं।

वर्ष 2015-16 के आंकड़ों के अनुसार 6.94 लाख कंपनियों ने रिटर्न दाखिल किया था जिनमें से 6.67 लाख कंपनियों ने 50 करोड़ रुपये से कम का कारोबार किया है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि बड़ी कंपनियों की तुलना में एमएसएमई क्षेत्र को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना होगा। सरकार के इस निर्णय से राजस्व में प्रतिवर्ष 7,200 करोड़ रुपये का घाटा होने की बात कही जा रही है।